कानपुर देहात: हाईटेंशन लाइन के खंभों पर चढ़ गए किसान आवारा पशु से खेतों की रखवाली करने के लिए


Kishan ki halat kharab 


आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक अनोखा तरीका निकाला है आवारा पशुओं से खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए। आवारा जानवरों से खेतों की रखवाली करने के लिए यहां किसानों ने जमीन पर नहीं बल्कि खेतों पर लगे हाईटेंशन लाइन के खम्बो पर चढ़कर खेतों की रखवाली कर रहे हैं। खेतों की रखवाली करना इस तरह से किसानों के लिए जोखिम भरा है।

किसानों का कहना है कि आवारा जानवर उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। दिन हो, चाहे रात हो, रात मैं जब मैं खेतों पर रहकर रखवाली करते हैं तो आवारा जानवर उन्हें घायल कर देते हैं, इसलिए उन्होंने एक अनोखे तरीके से खंभे पर चढ़कर खेतों की रखवाली करने का तरीका निकाला है।


आवारा जानवरों को लेकर किसानों की राय

आपको बता दें कि यहां एक दो  किसान के साथ नहीं बल्कि कई किसान आवारा जानवरों से परेशान है। जो अपने हाथों में लाठी लेकरजानवरों को अपने खेतों से हाकते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि हाई टेंशन लाइन पर चढ़े किसानों को स्थानीय लोगों ने किसी तरह नीचे उतारा। हाईटेंशन लाइन के खंभे पर चढ़े किसान कंचन सिंह का कहना है कि आवारा जानवर उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। एक-दो बीघे नहीं बल्कि सैकड़ों बीघा फसलें आवारा जानवर अब तक बर्बाद कर चुके हैं. उनका कहना है कि किसानों की बात कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।
वहीं, गांव के ही रहने वाले किसान सूरज सिंह ने बताया कि उनकी 4 बीघे फसलों को आवारा जानवर पूरी तरह से बर्बाद कर रहे हैं। इस पर किसी भी अधिकारी का कोई ध्यान नहीं जा रहा है। ना ही सरकार उनकी कोई मदद कर रही है।


यह मामला सूरत सिंह और कंचन सिंह का ही नहीं बल्कि गांव में सभी ग्रामीणों का यही कहना है कि आवारा जानवर उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। यहां पर बच्चे बूढ़े और बुजुर्ग सभी अपने हाथों में लाठी लिए आवारा जानवरों को अपने खेतों से भगा रहे, लेकीन इस मामले में जिले के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।


Logon Ko kahana hai ki sarkar unki  baat  nahin sun rahi

क्योंकि आपको बता दें कि ऐसा नहीं है सरकार ने गांव गांव में गौशाला बनाई हुई हैं जिसमें से लोग छुट्टा जानवरों को जो आवारा जानवर हैं उनको उसमें कैद कर देते हैं बांध दिया जाता है जिससे किसी किसान की खेती को आवारा जानवर बर्बाद ना कर सके। अगर जानवर खुला घूमते हैं तो वह जाकर किसानों के खेतों में उनकी फसल बर्बाद करते हैं इसलिए सरकार ने सभी गांव में एक की गौशाला बनवाई है जिससे आवारा जानवरों को उसमें बांधा जाया जा सके।
और किसानों की खेती आवारा जानवरों से बचाई जा सके। सरकार ने गौशाला बनवाए हैं जिसमें सेवा बंधे हुए जानवरों वैसे तो गौशाला में गाय ही मानी जाती हैं गाय बछड़े बैल आदि बांधे जाते हैं और उनके खाने-पीने का भी पूरा ध्यान दिया जाता है वहां कुछ कर्मचारी लगाए हुए हैं सरकार ने था कि उनके खाने का ध्यान रखा जा सके।


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